Gopal Gupta

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श्रृंगार छंद

काम कमान तनी भोये,  रति नैन लगे जैसे मीठी कटारी,,
भिक्षा द्वार पे मांग रहे, कामदेव खड़े हो बन के भिखारी,,
सृष्टि रति मे रति सृष्टि मे, जीव जगत को सत्य जे भारी,,
देख के सूरत प्राण प्रिय की, लीला भूले लीलाधारी,,

!!2nd !!


छाए घटा तेरे केश खुले तो, जो हँसे तो पुष्प खिले वनमाली ,,
कामिनी काम को देख लगाए, वनमाल सी बाहें गले मे डारी,,
धोकनी सी चल स्वास रही, उर आनन्द को प्रमाद है भारी,,
काम रति उर नाम रति,जीवन को समान रति,,
 
        Gopal Gupta" Gopal "

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3 Comments

Gunjan Kamal

09-Apr-2023 08:46 PM

बहुत खूब

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Sachin dev

07-Apr-2023 06:12 PM

Nice

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Reena yadav

06-Apr-2023 08:50 PM

👍👍

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